हुमायूं का मकबरा - कैसे पहुंचे, कब पहुंचे, टिकट प्राइस, इतिहास

क्या आप हुमायूं का मकबरा घूमना चाहते हैं? आपको पता होना चाहिए कि हुमायूं का मकबरा कब और कैसे पहुंचा जाए, टिकट प्राइस, इतिहास और पूरी जानकारी
हुमायूँ का मकबरा एक ऐसा टूरिस्ट प्लेस है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। हुमायूं का मकबरा लाल किले और कुतुब मीनार की तरह लोकप्रिय तो नहीं हो सका। लेकिन इसका इतिहास जानने के बाद आपको हुमायूं का मकबरा सबसे खास लगेगा। इस मकबरे के पीछे की दर्दनाक कहानी आपको जरूर यहां खींच लेगी।

आज मैं आपको हुमायूं के मकबरे के बारे में सारी बातें बताऊंगा। आप हुमायूँ के मकबरे तक कैसे पहुँच सकते हैं? हुमायूं के मकबरे का टिकट प्राइस क्या है ? और यहां घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है ? और यहां आप हुमायूं के मकबरे के इतिहास के बारे में भी जानेंगे, जिसकी जानकारी दूसरी जगह ज्यादा उपलब्ध नहीं है।

पीक सीजन: जनवरी
ऑफ सीजन: जून
लोकप्रियता: ऐतिहासिक स्थल
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐
टिकट प्राइस: ₹35
समय: 6 AM - 6 PM

Humayun Tomb Tourism
हुमायूं का मकबरा, दिल्ली

हुमायूं का मकबरा - सम्पूर्ण यात्रा

हुमायूं का मकबरा दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन की दरगाह के पास स्थित है। यहां रोजाना हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं, जिनमें सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक होते आते हैं। दरअसल, दर्दनाक कहानी के कारण इस मकबरे की कहानी ज्यादा चर्चित नहीं हुई थी। क्योंकि लोग इतिहास में सिर्फ प्रेम और विलासितापूर्ण जीवन पर ध्यान देते हैं। और हुमायूँ का मकबरा इन सबसे बहुत अलग लगता है।

1993 में जैसे ही यूनेस्को ने हुमायूँ के मकबरे को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। इसी तरह यह मकबरा थोड़ा बहुत दुनिया भर में लोकप्रिय हो गया। इस विरासत स्थल को अब भारत सरकार द्वारा सहेजा जा रहा है। क्योंकि यह पहले ही काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है। ऐसा न हो कि लोगों को इसके बारे में पता ही न चले और इसका वजूद भी मिट जाए।

Humayun Mausoleum | Humayun Tomb Tourism
हुमायूं का मकबरा | हुमायूं का मकबरा, दिल्ली

हुमायूं के इस मकबरे की खास बात यह है कि यहां 150 से ज्यादा लोग दफन हैं। जिसमें बाबर और इसाक खान की समाधि भी शामिल है। इस मकबरे में पहली मंजिल पर 60 कमरे और दूसरी मंजिल पर 4 कमरे हैं। और हर कमरे में किसी न किसी की कब्र है। और बाकी के कब्र मकबरा के सामने वाले बगीचों में स्थित है।
ब्रिटिश सरकार के आने के बाद इसमें काफी बदलाव किया गया। जिसमें मुगल शैली के बगीचों को अंग्रेजी शैली में बदल दिया गया। बीच में बने सरोवर को गोल चक्कर में बदल दिया गया। और क्यारियों में बड़े-बड़े पेड़ लगाए गए। इसके साथ ही इस मकबरे पर की गई नक्काशियों पर सीमेंट की परत बिछाई गई थी।

हुमायूं के मकबरे का इतिहास

हुमायूँ मुगल साम्राज्य का दूसरा शासक था, इसका पूरा नाम नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ था। हुमायूँ का जन्म 6 मार्च 1508 को काबुल में हुआ था और मुगल काल में इसे बदकिस्मत राजा माना जाता था। हुमायूँ पहला मुगल साम्राज्य का शासक था जो दिल्ली आया और दीन पनाह नामक शहर बसाया।

सन 1539 में शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को हराकर दीन पनाह पर कब्जा कर लिया और उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया। और उसी स्थान पर पुराना किला बनवाया। 22 जून 1555 को हुमायूँ ने राजा सुल्तान सिकंदर सूर को हराकर दिल्ली पर दुबारा अपना अधिकार कर लिया।

Begum Hamida Bano and Akbar - Humayun Tomb Tourism
बेगम हमीदा बानो और अकबर - हुमायूं का मकबरा, दिल्ली

27 जनवरी 1956 को पुराना किला में शेर मंडल पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर हुमायूँ की मृत्यु हो गई। हुमायूँ की मृत्यु के बाद, उसके शरीर को वहीं दफनाया गया था। लेकिन बाद में राजा हेम चंद्र विक्रम आदित्य (हेमू) ने पुराने किले को जीत लिया। बचे हुए सैनिक हेम चंद्र विक्रम आदित्य से बचाने के लिए हुमायूँ की लाश को अपने साथ ले गए।

इस तरह हुमायूँ की लाश को 15 साल तक इधर उधर छुपाया गया। और अंत में हुमायूँ की लाश को उसके बेटे अकबर ने 1565 में अपने कब्जे में ले लिया। और हुमायूँ की विधवा बेगम हमीदा बानो के कहने पर अकबर ने हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह के पास हुमायूँ का मकबरा बनवाया। यह मकबरा 1572 में बनकर तैयार हुआ था। इस मकबरे का निर्माण पारसी वास्तुकार मरक मिर्जा गियाथ ने करवाया था। और इसे समकालीन इतिहासकार अब्द अल-कादर बंदा उनी द्वारा डिजाइन किया गया था।

ऐसा सुंदर मकबरा भारत में पहली बार बनाया गया था, जिसमें लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का प्रयोग किया गया था। इस मकबरे का डिजाइन इतना पसंद किया गया था कि बाद के सभी मकबरे इसी तरह बनाए गए थे। आज आप ताजमहल को इसका दूसरा रूप भी मान सकते हैं।

Nasiruddin Muhammad Humayun - Humayun Tomb Tourism
नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ - हुमायूं का मकबरा, दिल्ली

हुमायूं के मकबरे में जाने का सबसे अच्छा समय

आप सप्ताह के किसी भी दिन हुमायूं के मकबरे को देखने आ सकते हैं। यह कभी बंद नहीं होता। हुमायूं का मकबरा देखने के लिए आप सुबह 6 बजे से शाम के 6 बजे तक आ सकते हैं। अगर आप गर्मी के मौसम में आ रहे हैं तो आपको सुबह आना चाहिए। क्योंकि दिन में यहां तेज धूप के कारण गर्मी बढ़ जाती है। और सर्दियों के मौसम में दिन में घूमने की सलाह दी जाती है।

हुमायूं का मकबरा टिकट प्राइस 2022

टिकट प्राइस
भारतीय ₹35
विदेशी ₹500
फोटोग्राफी ₹00
वीडियोग्राफी ₹25

हुमायूं के मकबरे के पास सर्वश्रेष्ठ होटल

ये होटल बहुत सस्ते दामों पर हैं। होटलों की कीमत हम नीचे नहीं बता रहे हैं, क्योंकि कीमत समय के अनुसार बदल रही है। लेकिन हम आपको हर होटल का कॉन्टैक्ट नंबर देते हैं जिसे आप हर नंबर पर कॉल करके कीमत पूछ सकते हैं।
Hotels Contacts
Hotel Preet Palace ⭐⭐⭐ 01246201616
Krishna Inn 09911193339
The Beaufort Inn ⭐⭐⭐ 09871980574
Batra Holiday Home 08130046919
Oyo 49750 Surya Inn 01246201616

हुमायूं के मकबरे तक कैसे पहुंचे ?

  • नजदीकी बस स्टॉप: हुमायूं के मकबरे का सबसे नजदीकी बस स्टॉप पुलिस स्टेशन निजामुद्दीन है। यह सिर्फ 240 मीटर की दूरी पर है।
  • नजदीकी मेट्रो स्टेशन: हुमायूं के मकबरे का सबसे सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जोर बाग मेट्रो स्टेशन है। यह सिर्फ 3.5 किमी की दूरी पर है।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन: हुमायूं के मकबरे का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हजरत निजामुद्दीन है। यह सिर्फ 2.4 किमी की दूरी पर है।
  • नज़दीकी हवाई अड्डा: हुमायूँ के मकबरे का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा IGI है। यह सिर्फ 8.5 किमी की दूरी पर है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q. हुमायूं का मकबरा कहाँ स्थित है ?
हुमायूं का मकबरा दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन में स्थित है। इसका पूरा पता "मथुरा रोड ऑपोजिट, हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह, निजामुद्दीन वेस्ट, नई दिल्ली, 110013 इंडिया" है।

Q. हुमायूं का मकबरा किसने बनवाया था ?
सन 1556 में हुमायूँ की मृत्यु के बाद, अकबर ने हुमायूँ की विधवा बेगम हमीदा बानो के कहने पर 1570 में अपने पिता हुमायूँ का मकबरा बनवाया। इसमें पारसी वास्तुकार मरक मिर्जा गियाथ को निर्माण कार्य का प्रमुख बनाया गया था।

Q. हुमायूं कौन था ?
हुमायूँ मुगल साम्राज्य का दूसरा शासक था। जिसने अपने जीवनकाल में कई ठोकर खाई। उसका जीवन इतना खराब था कि उसका अपना भाई भी उसका दुश्मन बन गया था।

Q. हुमायूं के मकबरे का महत्व क्या है ?
हुमायूँ का मकबरा हुमायूँ के दुखद जीवन को बयां करता है। इस मकबरे को हुमायूं की मौत के 15 साल बाद बनाया गया था। इससे पहले हुमायूँ का शव पूरे भारत में इधर-उधर घूमता रहा। हुमायूं के मकबरे में मुगल के परिवार द्वारा दफनाए गए 150 से अधिक शव हैं।

Q. हुमायूं का मकबरा निकटतम मेट्रो स्टेशन कौन सा है ?
हुमायूँ के मकबरे का निकटतम मेट्रो स्टेशन जोर बाग मेट्रो स्टेशन है। हुमायूं का मकबरा यहां से महज 3.5 किलोमीटर की दूरी पर है।

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